द फॉलोअप डेस्कः
चंद्रयान -3 सफलता पूर्वक चांद की दक्षिणी ध्रुव पर पहुंच गया है। देशवासी इस वक्त गर्व में डूबे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जोहान्सबर्ग से लाइव थे। वह खूशी से फूले नहीं समा रहे थे। उन्होंने इसरो के सभी वैज्ञानिकों को धन्यवाद कहा और आने वाले लक्ष्य के लिए शुभकामनाएं दी है। उन्होंने कहा कि यह पल विकसित भारत के चंद्रकाल का है। इसरो ने अपनी पूरी ताकत लगाई है। जल्द ही हम हमारे सौरमंडल सीमाओं को जानने का सामर्थ रखेंगे और मानव के लिए ब्रह्मांड के अनेक संभावनाओं को साकार करने के लिए भी जरूर काम करेंगे। हमने भविष्य के लिए कई बड़े और महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए हैं। जल्द ही सूर्य के विस्तृत अध्ययन के लिए इसरो आदित्य L1 मिशन लॉन्च करने जा रहा है। इसके बाद शुक्र भी इसरो के लक्ष्य में से एक है। भारत बार-बार यह साबित कर रहा है कि स्काई इज नॉट द लिमिट। साइंस और टेक्नोलॉजी देश के उज्जवल भविष्य का आधार है। इसलिए आज के इस दिन को देश हमेशा के लिए याद रखेगा। यह दिन हम सभी को एक उज्जवल भविष्य की ओर प्रेरित करेगा। यह दिन हमें अपने संकल्पों के सिद्धि का रास्ता दिखाएगा। यह दिन इस बात का प्रतीक है की हार से सबक लेकर जीत कैसे हासिल की जाती है। एक बार फिर देश के सभी वैज्ञानिकों बहुत-बहुत बधाई और भविष्य के विषयों के लिए शुभकामनाएं।

चार साल से इस मिशन पर काम कर रहे थे वैज्ञानिक
बता दें कि ISRO के साइंटिंस्ट्स पिछले 4 साल से चंद्रयान-3 सैटेलाइट पर काम कर रहे थे। जिस समय देश में कोविड-19 महामारी फैली हुई थी, उस समय भी इसरो की टीम भारत के मिशन मून की तैयारी में जुटी थी। इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ का कहना है कि लगभग 700 करोड़ रुपये के मिशन को पूरा करने और चलाने के लिए लगभग 1,000 इंजीनियरों और वैज्ञानिकों ने काम किया। चंद्रयान-3 को पूरा करने के लिए फीमेल साइंटिस्ट और इंजीनियर्स ने भी अहम किरदार निभाया. चंद्रयान-3 को सफल बनाने में एस सोमनाथ के अलावा प्रोजेक्ट डायरेक्टर पी वीरमुथुवेल, मिशन डायरेक्टर मोहना कुमार, विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC) के निदेशक एस उन्नीकृष्णन नायर, यू आर राव सैटेलाइट सेंटर (URSC) के निदेशक एम शंकरन और लॉन्च ऑथराइजेशन बोर्ड (LAB) प्रमुख ए राजराजन ने भी अहम किरदार निभाया.
